Sirmaur Uday

विचार से विकास

प्रदेश के प्राचीन स्कूलों में से एक 1783 में स्थापित नाहन शमशेर स्कुल नाहन। उच्च न्यायालय के जस्टिस वीरेंद्र सिंह पहुंचे स्कुल ,याद किया अपना स्कूली समय।

शिक्षा के प्रसार को समाज की उन्नति व् विकास माना जाता है और इसी उदेशीय को लेकर 30  अप्रैल  1783  में तत्कालीन रियासत सिरमौर के महाराजा ने नाहन  में एक प्राथमिक पाठशाला के रूप में यह स्कुल आरम्भ किया। जोकि आज 242  वर्ष  वरिष्ठ माध्यमिक स्कुल फॉर बॉयज के लिए जाना जाता है। यह स्कुल प्रदेश के प्राचीन स्कूलों में से एक है और आज इसका 242 वा  स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। प्राथमिक स्कुल के बाद महाराजा शमशेर प्रकाश ने स्कुल को विकसित किया और महाराजा अमर  प्रकाश ने इसमें अलग से भवन निर्माण किया। इस स्कुल ने हिमाचल निर्माता डॉ यशवंत सिंह परमार प्रदेश को दिए औए अनेकों राजनीतिज्ञ ,प्रशासनिक अधिकारी ,न्यायविद ,खिलाडी इस स्कुल ने दिए हैं। यह स्कुल तब स्थापित किया गया था जब आसपास केवल लाहौर में ही स्कुल था। जिला के पहला स्कुल भी नाहन  का यह स्कुल रहा है। आज इसकी स्थापना के 242 वे  वर्ष पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस वीरेंद्र सिंह ने की जोकि खुद इस स्कुल के छात्र रहे हैं। आज के सम्मान समारोह में जहां उन्होंने अपने स्कूली दिनों ,उस समय के अध्यापकों ,मित्रों को याद  किया वहीं नई पीढ़ी को शिक्षा के महत्व का भी संदेश दिया।
जस्टिस वीरेंदर सिंह ने बतायाकि शिक्षा एक अमूल्य निधि है और विकास व् उन्नति के लिए आवश्यक है। वो आज इस अपने स्कुल में आकर बहुत प्रसन्न हैं उन्होंने यहां शिक्षा ग्रहण की और आज उन्हें अपने अध्यापक भी मिले हैं और बहुत यादें ताजा  हुई हैं। उन्होंने बच्चों से नशे से दूर रहने व् शिक्षा पर ध्यान देने की बात  भी कही
इतिहासकार, राज परिवार से जुड़े कंवर अजय बहादुर सिंह नेबतायाकि राज परिवार के महाराजा ने शिक्षा के प्रसार को स्कुल निर्माण किया और शमशेर इसमें महाराजा शमशेर प्रकाश ,अमर  प्रकाश ने महत्ब्पूर्ण योगदान किया। बाहर से आने वाले बच्चों के लिए उस समय बोर्डिंग हॉउस भी बनाया गया था जहां पर बच्चे रहते वपड़ते थे वः भवन आज भी है। सिरमौर का यह पहला स्कुल आज भी प्राचीन धरोहर को संभाले हुए हैं और नित नए विकास की और बढ़ रहा है।
उलेखनीय हैकि नाहन  का शमशेर स्कुल में आज भी भवन पुराने भवनों में चल रहा है हालाँकि इसमें नए भवन परिसर भी बनाये गए हैं लेकिन पुराने भवनों को सरंक्षित करके रखा गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *