त्रिभूवनेश्वरी मन्दिर जिला सिरमौर के मन्दिरों में अपना अहम स्थान रखता है।कौलां वाला भूड़ के साथ लगती पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर न केवल अपनी प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विख्यात है अपितु असंख्य श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी है।यह देवी भगवान शिव की दश महाविद्याओं में से एक है। बताया जाता है कि सतयुग में भगवान शिव माता पार्वती जी के साथ शिवालिक क्षेत्र के इस स्थान पर भ्रमण कर रहे थे तथा माता पार्वती को यह स्थान काफी मनमोहक लगा तथा यहीं विश्राम करने लगी। शिव जब जिला के भूरेश्वर महादेव पहुंचे तो पार्वती जी को साथ न देखकर शंकर उन्हें खोजते हुए यहां आए। माता पार्वती ने भगवान शिव को कहा कि मैं सदैव इस स्थान पर विराजमान रहूंगी। माता की शक्ति यहां हर समय विराजमान हैं।वर्तमान में इस देवी को दूध पूत की दाती के रूप में पूजा जाता है। आषाढ़ मास के चारों रविवारों को यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। यहां देशी घी का बलोआ चढ़ाया जाता है। पहले यहां बकरी की बलि भी दी जाती थी परन्तु अब बकरी को जीवित हीं छोडा जाता है।जिला सिरमौर के नाहन व राजगढ़ उपमंडल के नारग, बागथन गिन्नी घाड क्षेत्र तथा हरियाणा के मोरनी हिल्स वासियों की यह कुलदेवी है जो पूरा वर्ष यहां अपनी मन्नतें पूरी होने पर नतमस्तक होने आते हैं।रीगडवाला, पीला खील तथा सदौडघाट से इस मन्दिर के लिए लिंक रोड का निर्माण किया जा रहा है। पेयजल आपूर्ति की जा चुकी है श्रद्धालुओं के विश्राम के लिए सराए बनायी गई है। सरकार द्वारा विकास कार्य निरंतर करवाए जा रहे हैं।