सिंदूर हर मंदिर में एक अहम कारक माना जाता है और जहां देवी देवताओं को अर्पण किया जाता है वहीं श्रद्धालुओं के माथे पर भी लगाया जाता है। बाजारों में मिलने वाला सिंदूर अधिकांश रासायनिक होता है। लेकिन अब माता त्रिलोकपुर मंदिर जोकि महा माया बाला सुंदरी का प्रसिद्ध सिद्धपीठ है वहां अब रासायनिक सिंदूर नहीं अपितु प्राकृतिक सिंदूर उपयोग में लाया जा रहा है। मंदिर न्यास के प्रयासों से अब यह संभव हो पाया हैकि अब सिंदूर के पौधे से बनाये सिंदूर का प्रयोग हो रहा है।
दरअसल नाहन के कोलर नामक स्थान पर एक उन्नतशील किसान गिरधारी लाल ने अपने हर्बल गार्डन में सिंदूर के पौधे तैयार किये हैं और वो व्यवसायिक तौर पर सिंदूर का उत्पादन कर रहे हैं और उनके अनुरोध व् कंसेप्ट पर उपायुक्त प्रियंका वर्मा की सहमति से यह सिंदूर उनसे 6500 रुपए प्रति किलो की दर से लिआया जा रहा है। इससे न केवल श्रद्धालुओं को प्राकृतिक सिंदूर लगेगा बल्कि किसान गिरधारी लाल की भी आमदनी बढ़ेगी।
संयुक्त सचिव और एस डी एम नाहन राजीव सांख्यान ने बतायाकि प्रसिद्ध सिद्धपीठ त्रिलोकपुर में अब केवल प्राकृतिक सिंदूर से तिलक लगाने का प्रयास किया जा रहा है और इसके लिए किसान गिरधारी से बात हो चुकी है और अब श्रद्धालुओं को इसी प्राकृतिक सिंदूर से तिलक करनाशुरू किया गया है। रासायनिक सिंदूर वैसे भी त्वचा के लिए अच्छा नहीं माना जाता। और अब एक नया प्रयास मंदिर त्रिलोकपुर मेंकिया गया है।