Sirmaur Uday

विचार से विकास

संगडाह उपमण्डल के पिडियाधार में ऊंची चोटी पर  श्री खलोग देवता का भव्य मंदिर , मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है

जिला सिरमौर के श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र के संगडाह उपमण्डल के पिडियाधार में ऊंची चोटी पर  श्री खलोग देवता का भव्य मंदिर स्थित है।यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है तथा इसका इतिहास पाण्डवों के अज्ञातवास से जुड़ा बताया जाता है। यह मंदिर असंख्य लोगों की आस्था का केंद्र है जो यहां आकर भगवान के चरणो मे नतमस्तक होते हैं तथा खलोग देवता यहां आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामनाऐं पूरी करते हैं।
 प्राचीन समय में इस क्षेत्र के किसी व्यापारी को गलती से दिल्ली में कारावास में डाल दिया गया।वह जेल में भगवान की स्तुति करता था। एक रात को उसे स्वप्न आया कि वह आजाद हो गया है तथा सुबह वह वास्तव में बन्धन मुक्त हो गया।वह व्यापारी अपने गांव जाते समय जब गिरि नदी को पार कर रहा था तो वहां नदी में उसे एक विशाल मूर्ति दिखाई पड़ी। उसने उस मूर्ति को उठाने की कोशिश की परन्तु वह मूर्ति उठाने में सफल न हो सका।वह गांव से कई लोगो को लेकर आया तथा मूर्ति को ले जाकर पिडियाधार स्थित इस ऊंची चोटी पर स्थापित कर दिया तथा निरन्तर इसकी पूजा प्रारंभ कर दी।
 इस मन्दिर में पाषाण से निर्मित लगभग चार  प्रतिमाएं मौजूद हैं जो पाण्डव कालीन बताई जाती हैं। देवता के गुर यहां लोगों के कष्टों का निवारण करते हैं। यह मंदिर खुड्डू तथा रायकी नामक दो भोजों लगभग सत्रह गांवों के हजारों लोगों की आस्था का केंद्र रहा है, परन्तु वर्तमान में महिमा, ख्याति तथा चमत्कारों के कारण राजगढ़, पच्छाद के गिन्नी घाड, नाहन के सैनधार क्षेत्र में भी इसकी मान्यता है।संगडाह से यह आलौकिक मन्दिर लगभग तीस तथा नाहन से लगभग   110 किलोमीटर दूर है।   सोलन से वाया नौहराधार यह लगभग नब्बे किलोमीटर दूर है।
यहां साल में दो उत्सव मनाए जाते हैं जिसमें एक बिशडी/बिशु जो बैशाख की संक्रांति से दो दिन पहले तथा दूसरा श्रावण मास की संक्रांति से एक दिन पहले होता है। इनमें असंख्य श्रद्धालु भाग लेते हैं। इसके साथ ही नवरात्रों तथा अन्य शुभ अवसरों पर यहां विशेष भण्डारों का आयोजन किया जाता है। स्थानीय लोगों द्वारा यहां व्यवस्था संचालन के लिए समिति का गठन किया है।
  खलोग देवता की दो देवठियां हैं जिनमें एक निहोग में स्थित है। इनमें निहोग स्थित देवठी की मूर्तियां दीपावली, प्रतिपदा तथा दूज को दोनों भोजों में भ्रमण पर निकलती हैं। जब यह देवता भ्रमण/परिक्रमा पर विभिन्न क्षेत्रों में जाते हैं तो श्रद्धालु वहां जागरण भण्डारों का आयोजन करते हैं। इसके अलावा भी चैत्र , ज्येष्ठ श्रावण तथा पोष मासों को छोड़ कर अन्य शुभ अवसरों पर देवताओं को आमंत्रित किया जाता है। इनकी पालकियों को केवल करिन्दे ही ले जाते हैं।
यहां से चारों ओर प्राकृतिक सौंदर्य के दर्शन किए जा सकते हैं। 2018 में इस मन्दिर के जीर्णोद्धार का कार्य किया गया जिस पर लगभग पचास लाख रुपए खर्च किए गए हैं। यदि योजनाबद्ध तरीके से इस क्षेत्र का विकास करते हुए आगंतुकों के लिए अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो यह स्थान धार्मिक स्थल के साथ साथ खुबसूरत पर्यटक स्थल के रूप में भी उभर सकता है।
 लेखक
सुभाष चंद्र शर्मा
गांव खदरी डा बिक्रम बाग़ नाहन

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