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विचार से विकास

पांवटा साहिबराजेश थापा: कला के जरिए राष्ट्रीय पहचान बनाने वाले मूर्तिकार, जिनकी मूर्तियां देशभर में बिखेर रही हैं भारतीय संस्कृति की छटा

कला और मेहनत अगर एकजुट हो जाएं, तो इंसान किसी भी ऊंचाई को छू सकता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं राजेश थापा, जो गरीबी और संघर्षों के बावजूद अपनी कला के दम पर देशभर में एक प्रतिष्ठित कलाकार बन चुके हैं।राजेश थापा का जन्म 1972 में देहरादून में हुआ था। बचपन से ही उनका सपना भारतीय सेना में भर्ती होने का था, लेकिन आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों ने उनके सपनों को पूरा नहीं होने दिया।हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी। बचपन में ही पेंटिंग और मूर्तिकला में रुचि लेने वाले राजेश ने मिट्टी से मूर्तियां बनाना शुरू किया और धीरे-धीरे इस कला को अपनी पहचान बना लिया।

आज वे पूरे देश में एक जाने-माने मूर्तिकार और चित्रकार के रूप में प्रसिद्ध हैं।राजेश थापा की बनाई मूर्तियां उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र और कई अन्य राज्यों में स्थापित हैं।

इन मूर्तियों में महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, डॉ. भीमराव अंबेडकर, भगवान राम, शिव-पार्वती, हनुमान, बुद्ध और अन्य ऐतिहासिक तथा धार्मिक मूर्तियां शामिल हैं।
उनकी कला भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोने और उसे नई पहचान देने का काम कर रही है।
शहीदों के सम्मान में बनाते हैं निशुल्क मूर्तियां
राजेश थापा भले ही सेना में भर्ती नहीं हो सके, लेकिन उनका दिल आज भी देश के लिए धड़कता है।
देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए वे निशुल्क मूर्तियां बनाते हैं।
अब तक उन्होंने हिमाचल, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में 6 से 7 शहीद स्मारक स्टेचू फ्री में बनाए हैं। यह उनके देशप्रेम और कला के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है।
सरकारी और सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित हो रही हैं उनकी कलाकृतियां
उनकी मूर्तियां और पेंटिंग्स सरकारी पार्कों, संस्थानों, स्मारकों और हेरिटेज स्थलों पर स्थापित हो रही हैं।

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