:सिरमौर जिला मुख्यालय नाहन को ऐतिहासिक धरोहरों के लिए भी जाना जाता है यहां पट रियासतकालीन व् ब्रिटिश काल की अनेक धरोहरें आज भी सरंक्षित है। ऐसी भी ही एक रियासतकालीन धरोहर है शहर के नाहन शिमला मार्ग से साथ बना हाथी की कब्र। हाथी की कब्र तत्कालीन रियासत का राजा ने अपने प्रिय हाथी बृजराज की स्मृति में बनवायी थी जिसकी मृत्यु 1914 में हुई थी। कब्र पर लिखी कहानी हिंदी ,उर्दू ,इंलिश में है जिसके अनुसार यह हाथी महाराजा को बहुत प्रिय था और हाथी को भी बच्चों से विशेष प्रेम था। जिसके चलते यह हाथी की कब्र बनवायी गयी और लोग यहां पूजा करने लगे और कई मन्नतें भी यहां पर पूरी होती हैं खासकर मियादी बुखार ,मुहासे, फुंसी आदि यहां पर गुड़ का की कब्र की बड़ी मान्यता है और यहां चढ़ाने से ठीक हो जाती हैं।
इस स्थान की देशभाल साथ लगती न्यू कश्यप राजपूत समिति करती है। इस स्थान के साथ ही महाऋषि कश्यप का भी मंदिर स्थापित है। वर्ष में एक बार यहां पर हवन एवं भंडारे का आयोजन होता है और साथ ही हाथी की कब्र पर भी विशेष गुड़ आटे का बना रोट भी अर्पित किया जाता है।
आज इस अवसर पर हाथी की कब्र पर आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने की। उन्होंने ऋषि कश्यप मंदिर में हवन समारोह में भाग लिया और हाथी की कब्र पर रोट अर्पित करके प्राचीन परम्परा को भी निभाया।
न्यू कश्यप राजपूत सभा के अध्यक्ष नरेश कश्यप ने बतायाकि हाथी की कब्र की बड़ी मान्यता है यहां पी त्वचा रोगों ,बुखार आदि का निदान मन्नत मांगने से ठीक हो जाता है। साथ ही कश्यप मंदिर है। वर्ष में मंदिर में हवन कार्यक्रम होता है और साथ में हाथी की कब्र पर रोट चढ़ा कर पूजा की जाती है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने कहाकि भारत की सनातन संस्कृति तेजी से बढ़ रही है और इसमें ऋषि परम्परा का बहुत बड़ा योगदान रहा है। आज ऋषि कश्यप जयंती पर अनेक आयोजन मंदिर में हो रहे हैं और साथ ही शाही हाथी बृजराज की कब्र पर रोट चढ़ाने की परम्परा का भी निर्वहन किया गया है। उल्लेखनीय हैकि हाथी की कब्र नाहन के प्रसिद्ध आकर्षक स्थलों में शामिल है और लोग यहां बड़ी श्रद्धा से नमन करने पहुंचते हैं ,वर्षों से चली आ रही यह परम्परा आज भी कायम है।