पांवटा साहिब, पांवटा साहिब में ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में उस समय विवाद खड़ा हो गया जब मंच से कथित रूप से “चीमा कीमा नहीं चलेंगे” जैसे आपत्तिजनक नारे लगाए गए। ये नारे सिक्ख समुदाय से जुड़े एसडीएम के संदर्भ में बोले गए, जिससे सिक्ख समाज में भारी रोष फैल गया है।पोंटा में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में सिक्ख लोगो ने आरोप लगाया कि जानबूझकर उन्हें टारगेट किया गया है। यदि प्रशासनिक अधिकारी के खिलाफ बोलै जाता तो उन्हें कोई एतराज नहीं था मगर यहां पर उनकी कौम को टारगेट किया गया है। वैसे भी इतने बड़े मंच से किसी अधिकारी के लिए इस तरह से शंब्द ठीक नहीं है लेकिन यहां पर ऐसा हुआ है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने प्रशासन व् मुख्यमंत्री को 2 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि ऐसे आरोपियों के खिलाफ एफ आई दर्ज न हुआ और इन्होने माफ़ी न मांगी तो बड़ा प्रदर्शन किया जायेगा। सिक्ख संगठनों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि भाजपा नेताओं द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न केवल समुदाय की भावनाओं को आहत करता है, बल्कि यह समाज में विभाजन पैदा करने वाला व्यवहार है। सिक्ख प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि भगवा वस्त्र पहनकर कार्यक्रम में शामिल हुए भाजपा समर्थकों ने नफरत फैलाने का प्रयास किया और सिख कौम के प्रति दुर्भावना को खुले तौर पर जाहिर किया।
सिक्ख संगठनों ने भाजपा नेताओं पर सिक्ख समाज का अपमान करने का आरोप लगाया है और कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां गुरुद्वारों में माथा टेकते हैं और सिक्खों को सम्मान देने की बात करते हैं, वहीं हिमाचल में भाजपा के नेता उनके विपरीत आचरण कर रहे हैं।
विवाद के चलते अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सार्वजनिक माफी की मांग उठ रही है। सिक्ख समुदाय ने चेतावनी दी है कि यदि इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आने वाले समय में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।