सिरमौर जनपद के गिरी पार क्षेत्र में आज भी कई किसान परंपरागत घराट (प्राचीन पन चक्की ) में पीसे आटे का सेवन कर रहे हैं। आधुनिक युग में जहाँ बिजली से चलने वाली चक्कियाँ और छोटी घरेलू चक्कियाँ हर घर में देखने को मिलती हैं, वहीं गिरी नदी और आसपास के नदी-नालों के समीप बसे किसान आज भी अपने अनाज को पानी से चलने वाली पन चक्की में ही पिसवाना पसंद करते हैं।
घराट मालिकों का कहना है कि घराट में पीसा अनाज अधिक स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है। इन घराटों में गेहूं, मक्की, जौ, चना, हल्दी, सत्तू आदि अनाज पीसे जाते हैं। हालांकि क्षेत्र में जलस्रोतों के सूखने और पानी की मात्रा कम होने के कारण कई घराट लुप्त होते जा रहे हैं। जहाँ पानी की उपलब्धता अधिक है, वहीं कुछ स्थानों पर घराट आज भी जीवित परंपरा के रूप में बने हुए हैं।
पहले अधिकांश किसान घराट में पीसे अनाज का ही सेवन करते थे, लेकिन समय के साथ इनकी संख्या घटती जा रही है। वर्तमान में क्षेत्र के दूधराज इलाके में ही कुछ गिने-चुने कार्यशील घराट देखने को मिलते हैं।
आज के आधुनिक दौर पर फिर से जरूरत हैकि घराट को लोकप्रिय बनाने का प्रयास होना चाहिए ताकि लोगो को स्वास्थय वर्धक आटा उपलब्ध हो सके।