पातालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व को लेकर भव्य तैयारियां जोरों पर हैं। मंदिर परिसर को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। रंग-रोगन व सजावट का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। श्रद्धालुओं का आगमन भी शुरू हो चुका है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। उत्तराखंड और हरियाणा सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भक्त भगवान शिव के दर्शन के लिए पातालेश्वर मंदिर पहुंचते हैं।
पातालेश्वर मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन और पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि यह मंदिर स्वयंभू शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। जनश्रुतियों के अनुसार, यह शिवलिंग पाताल लोक से जुड़ा हुआ है, इसी कारण इस मंदिर का नाम पातालेश्वर पड़ा।स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान तपस्या और साधना की भूमि रहा है। वर्षों से यह मंदिर क्षेत्र के लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक बना हुआ है।