इग्लू (Igloo) की शुरुआत मुख्य रूप से कनाडा के मध्य आर्कटिक और ग्रीनलैंड के थुले क्षेत्र में रहने वाले इनुइट (Inuit) या एस्किमो लोगों द्वारा की गई थी। यह प्राचीनकाल से रहने वाले शिकारी लोगों का अस्थायी शीतकालीन घर था, जो बर्फ की ईंटों से गुंबद के आकार में बनाया जाता था।दो दोस्तों की जिद ने बदल दी हिमाचल के इस गांव की तकदीर! आज ‘इग्लू विलेज’ के नाम से है मशहूर, खूब आ रहे पर्यटक
हिमाचल प्रदेश की पर्यटन नगरी मनाली से करीब 14 किलोमीटर दूर बसा सेथन गांव ,जहां पहले पर्यटकों से अछूता था. वहीं गांव के 2 युवाओं के कुछ नया करने के प्रयास ने गांव को एक नई पहचान दिल दी है. गांव के ताशी और विकास ने 10 साल पहले गांव में पहले इग्लू का निर्माण किया. जिसके बाद अब पर्यटकों के बीच यह गांव ही इग्लू विलेज के नाम से मशहूर है. ऐसे में यहां आने वाले पर्यटक भी अब इस गांव को बेहद पसंद कर रहे हैं. यहां की शांत खूबसूरत वादियों में सैलानी पहुंचना शुरू हुए हैं
विकास ने बताया कि सेथन घाटी में पहले दूर दूर से सैलानी गर्मियों में ट्रैकिंग रूट में ट्रैकिंग पर जाने के लिए ही सैलानी यहां पहुंचते थे. लेकिन अब यहां घाटी में विंटर टूरिस्म को भी बढ़ावा मिला है. ऐसे में अब यहां न सिर्फ इग्लू में रहने के लिए पर्यटक आ रहे है. बल्कि घाटी में आसपास और भी एडवेंचर एक्टिविटीज भी शुरू हो गई है.
ताशी ने बताया कि इग्लू में स्टे करने के लिए सैलानी ऑनलाइन माध्यमों से बुकिंग कर सकते है. ऐसे में यहां इग्लू स्टे के लिए अलग अलग पैकेज भी सैलानियों को दिए जा रहे है. उन्होंने बताया कि मनाली इग्लू स्टे के सोशल मीडिया पेज या वेबसाइट के जरिए इग्लू में रहेंने के लिए बुकिंग की जा सकती है. उन्होंने बताया कि ऐसे में इग्लू स्टे के लिए अलग अलग 3 पैकेज यहां पर रहते है.
विकास ने बताया कि इस साल बर्फ लेट होने से वह लोग इग्लू का निर्माण देरी से कर पाए. ऐसे में उन्हें कई सारी बुकिंग को कैंसिल भी करना पड़ा. उन्होंने बताया कि हर साल कई सैलानी इग्लू में रहने के लिए मनाली पहुंचते है . ताशी ने बताया कि इग्लू में रहने आने के लिए कई ऐसे भी पर्यटक है जो हे साल यहां रुकने आते है. साथ ही यहां आने वाले लोगो को यह अनुभव इतना खास लगता है कि उनके कहने पर और भी लोग इग्लू में रहने पहुंचते हैं.