हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी द्वारा नाहन के बचत भवन में लाल चंद प्रार्थी राज्य स्तरीय जयंती समारोह बड़े हर्षोल्लास से मनाया गया। कार्यक्रम में पद्मश्री विद्यानन्द सरैक ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला सिरमौर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. ओम प्रकाश राही ने की।
प्रथम सत्र शोधपत्र वाचन का था, जिसमें प्रदेश के युवा साहित्यकार आचार्य सुरेश शर्मा भारद्वाज ने बतौर मुख्य वक्ता “लाल चंद प्रार्थी के काव्य में भाव तथा शिल्प—एक विवेचन” विषय पर अपना सारगर्भित शोधपत्र प्रस्तुत किया। साथ ही डॉ. आशा शर्मा ने “लाल चंद प्रार्थी तथा पहाड़ी संस्कृति—एक दूसरे के पर्याय” विषय पर अपना शोधपूर्ण शोधपत्र प्रस्तुत किया।शोधपत्र वाचन के पश्चात् परिचर्चा में सर्वप्रथम जिला कुल्लू के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सूरत राम ठाकुर ने प्रार्थी जी से जुड़े विभिन्न संस्मरणों को प्रस्तुत किया। जिला सिरमौर के साहित्यकार यज्ञदत्त ने अपने वक्तव्य में प्रार्थी जी के पदचिन्हों पर चलने का आवाहन किया। सोलन के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शंकर वशिष्ठ ने प्रार्थी जी के जीवन व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। परिचर्चा में सोलन के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार व समाज सेवी डॉ मदन हिमाचली ने अपने वक्तव्य में लाल चंद प्रार्थी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालने के साथ साथ हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी के विभिन्न पद रिक्त होने पर खेद व्यक्त करते हुए वर्तमान स्थिति पर असंतोष व्यक्त किया। कार्यक्रम का मंच संचालन युवा साहित्यकार डॉ. दिलीप वशिष्ठ ने किया।
दूसरा सत्र बहुभाषी कवि सम्मेलन के रूप में आयोजित किया गया। जिसकी अध्यक्षता डॉ. शंकर वशिष्ठ ने की। कवि सम्मेलन में डॉ. सुनील डिमरी, शिव प्रकाश पथिक, शेरजंग चौहान, दिलीप ठूंडू, कमल कुमार पाराशर, स्नेहलता, रोशन जसवाल विक्षिप्त, पंकज तनहा, रामलाल पाठक, ऊषा सूर्यवंशी, केहर सिंह अत्रि, नगीना शर्मा, अशोक दर्द, अंजना रतन, नासिर सुज्जई, प्रताप पाराशर, प्रो. दीपा चौहान, अर्चना कौशिक, नवीना शर्मा, अनन्त आलोक, खजान सिंह कंवर, सत्यनारायण स्नेही, डॉ. पवन कुमार गौतम, डॉ. नरेंद्र शर्मा, सुमित कुमार, प्रेमपाल आर्य, रतन निर्झर, डॉ. ईश्वर राही तथा डॉ. श्रीकांत अकेला आदि ने अपना काव्यपाठ प्रस्तुत किया।
समारोह की जानकारी देते हुए अकादमी की सहायक सचिव डॉ. श्यामा वर्मा ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की समृद्ध कला, संस्कृति और भाषा का संरक्षण एवं संवर्धन करना है।