आईआईएम सिरमौर का दसवाँ वार्षिक दीक्षांत समारोह धौलाकुआं में हुआ आयोजित भारतीय प्रबंध संस्थान सिरमौर का 10वाँ दीक्षांत समारोह आज धौला कुआँ स्थित इसके स्थायी परिसर में आयोजित किया गया.सिद्धार्थ शर्मा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), टाटा ट्रस्ट्स, ने मुख्य अतिथि के रूप में समारोह में शामिल हुए।
इस वर्ष कुल 215 एमबीए, 49 एमबीए (टूरिज्म मैनेजमेंट), 17 एमबीए (टीटीएचएम), 31 एग्जीक्यूटिव एमबीए, 18 एग्जीक्यूटिव एमबीए (डीटीए), 8 PGPEX-LSM प्रतिभागी और 2 पीएचडी शोधार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। शैक्षणिक उत्कृष्टता के तहत केशव जसवाल को चेयरमैन गोल्ड मेडल और यश मुनोट को डायरेक्टर गोल्ड मेडल के साथ सर्वश्रेष्ठ सर्वांगीण प्रदर्शन के लिए भी सम्मानित किया गया। वित्त में गोविंद गर्ग और मार्केटिंग में प्रथम केडिया को गोल्ड मेडल मिला। एग्जीक्यूटिव कार्यक्रमों में कुणाल गुप्ता और गुंजन कपूर को शीर्ष सम्मान दिए गए, जबकि एमबीए (टूरिज्म मैनेजमेंट) में एक्कुस बीर सिंह आहूजा को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।
संस्थान के निदेशक डॉ. प्रफुल्ल वाई. अग्निहोत्री ने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि आईआईएम सिरमौर ने शैक्षणिक कार्यक्रमों, अनुसंधान, वैश्विक सहयोग, प्लेसमेंट और संस्थागत विकास में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने संस्थान के विस्तृत कार्यक्रम पोर्टफोलियो की जानकारी दी, जिसमें एमबीए, पर्यटन प्रबंधन, टीटीएचएम, पीएचडी, बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज और विभिन्न एग्जीक्यूटिव कार्यक्रम शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि संस्थान विविध प्रबंधन कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को गुणवत्तापूर्ण और मूल्य-आधारित शिक्षा प्रदान कर रहा है। इस वर्ष संस्थान का प्लेसमेंट प्रदर्शन भी प्रभावशाली रहा। 400 से अधिक कंपनियों के जुड़ाव के बीच लगभग 220 कंपनियों ने अंतिम प्लेसमेंट में हिस्सा लिया और 250 से अधिक ऑफर दिए। औसत पैकेज ₹15.9 लाख और उच्चतम ₹30 लाख प्रति वर्ष दर्ज किया गया, जो संस्थान की बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर संस्थान ने जर्मनी, फ्रांस और मॉरीशस के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ साझेदारी कर अपनी उपस्थिति मजबूत की है। छात्र आदान-प्रदान, संयुक्त कार्यक्रम और शोध सहयोग के माध्यम से संस्थान अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण को लगातार विस्तार दे रहा है।
इस मौके पर मुख्य अतिथि सिद्धार्थ शर्मा ने अपने दीक्षांत भाषण में छात्रों को उद्देश्य, विनम्रता और नैतिकता के साथ नेतृत्व की राह अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने अति-आत्मविश्वास और आत्म-संदेह से बचते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाने, हर कार्य में सर्वोत्तम प्रयास करने और सामाजिक उत्तरदायित्व को केंद्र में रखने पर जोर दिया। उन्होंने व्यवसाय को केवल लाभ नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बताया और नैतिक मूल्यों से कभी समझौता न करने की सलाह दी।