जिला सिरमौर के मुख्यालय नाहन के मोहल्ला शमशेर पुर कैन्ट में माता महामाया बाला सुन्दरी का अलौकिक मन्दिर स्थित है, यहां वैसे तो पूरे वर्ष श्रद्धालु मां के चरणों में नतमस्तक होते हैं परन्तु चैत्र तथा अश्विन नवरात्रों में यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। गौरतलब है कि यह मन्दिर धार्मिक सद्भावना का भी प्रतीक है। इस मंदिर की व्यवस्था संचालन के लिए जिस समिति का गठन किया गया है उसमें हिन्दू तथा मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग शामिल हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर की स्थापना नब्बे के दशक में की गई। बताते हैं कि इस मोहल्ले में जब स्कूल भवन का निर्माण कार्य किया जाना था तो मां कन्या के रूप में लोगों को स्वप्न में दर्शन देकर यहां अपनी उपस्थिति का एहसास कराने लगी। लोगों ने स्थानीय स्व याकूब बेग की अध्यक्षता में मिटींग आयोजित की तभी किसी युवक में माता ने प्रवेश कर स्वयं को माता महामाया बाला सुन्दरी बताया तथा स्कूल भवन से पहले अपने मन्दिर निर्माण का आदेश दिया। माता की ज्योति कांगड़ा जिले के मां ज्वाला जी सिद्ध पीठ से लाई गई।इस मंदिर का निर्माण कार्य राजमिस्त्री चीडां वाली मोहल्ला के स्व मुस्ताक अहमद के द्वारा स्व याकूब बेग तथा स्व टेक बहादुर की देखरेख में करवाया गया।
इस मंदिर निर्माण में स्थानीय सभी धर्मों तथा सम्प्रदायों के लोगों ने निस्वार्थ भाव से कार्य किया गया। मन्दिर का निर्माण कार्य 27 मार्च 1994 को सम्पन्न हुआ।दोनों नवरात्रों में इस मंदिर में श्री दुर्गा सप्तशती पाठ तथा हवन भण्डारे का आयोजन किया जाता है।हर साल सत्ताईस मार्च को इस मंदिर का स्थापना दिवस समारोह मनाया जाता है।याकूब बेग ने लगभग पच्चीस साल इस मंदिर के प्रबंधन कार्यों की अध्यक्षता की। उनके मरणोपरांत इस उत्तरदायित्व को गोबिंद गुरूंग संभाले हुए हैं जबकि आसिफ बेग कमेटी के उपाध्यक्ष का कार्य भार संभाले हुए हैं।
1997 में इस मंदिर परिसर में भगवान शिव की मूर्ति का निर्माण ड्राइंग अध्यापक ईमामूदीन द्वारा करके यहां विधिवत की गई ।मन्दिर परिसर में ही कमेटी के प्रधान गोबिंद गुरूंग ने अपनी स्व माता लक्ष्मी तथा पिता स्व बाल किशन की पुण्य स्मृति में 19 मई 2023 में शनि देव की मूर्ति भी स्थापित की।श्रद्धालुओं का मानना है कि माता यहां आने वाले हर व्यक्ति की मनोकामना पूरी करती है।
साभार :सुभाष चंद्र शर्मा खदरी डा बिक्रम बाग़