स्कूलों में अक्सर देखा जाता हैकि बच्चों को कक्षा में पंक्तियों में बिठाया जाता है जिसमे कुछ बच्चों कोपीछे बैठना पड़ता है। जिस कारण से उनमे आत्म विश्वास की कमी भी होने लग सकती है। बच्चों के बीच की इस दुरी को समाप्त करने के उदेशीय से नो मोर बैक बेंचर्स अभियान आरम्भ किया गया है। ताकि बच्चों के बीच में आगे पीछे बैठने से पैदा हुई दूरी को समाप्त किया जा सके।
यह अभियान सबसे पहले केरल यानि केरलम में आरम्भ किया गया था और हिमाचल में नाहन विधानसभा के तहत आने वाले ग्रामीण स्कूल राजकीय उच्च विद्यालय देवका में शुरू किया गया है। यहां स्कूल में अब बच्चे पंक्तियों की बजाय u आकार या अर्ध वृताकार में बैठाये जा रहे हैं।
इस नई सिटिंग प्रणाली का मुख्य लाभ यह हैकि इससे बच्चों के आत्म विश्वास में वृद्धि होती है ,बच्चे अधिक सक्रिय रहते हैं और अध्यापक भी उनपर पूरा ध्यान दे पाता है
स्कुल के इंचार्ज रजनी ठाकुर ने बतायाकि स्कूल में यह पहल पढ़ाई के पुराने तरीके से बदलकर शिक्षा को अधिक समावेशी बनाती है। इसी के चलते इसे स्कुल में लागु किया गया है।
उल्लेखनीय हैकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में अध्यापक व् छात्र अनुपात 1 ;25 और 1 ;30 रखा गया है। देवका स्कूल की यह पहल शिक्षा क्षेत्र में बहुत सराहनीय प्रयास है और प्रदेश में देवका स्कुल ऐसा है जिसने इस नई शिक्षा प्रणाली को अपनाने में रूचि दिखाकर पहल की है